फातिमा शेख सोशल रिफॉर्मर | फातिमा शेख का जीवन परिचय | fatima sheikh Biography in hindi , fatima sheikh social reformer in hindi

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दोस्तो आज के इस पोस्ट में हम आपको भारत की महान समाज सुधारक फातिमा शेख का जीवन परिचय जानने जिन्हें गूगल ने भी उनके बर्थ एनिवर्सरी पर डूडल बनाकर उनकी बर्थ एनिवर्सरी माना रहा है और आपको भी हमारे भारत देश की महान महिला के बारे में जरूर जानना चाहिए

क्योकि दोस्तो हमे हमारे ही महान लोगो के बारे में पता नही होता है यहाँ तक कि हमे उनके दुवारा कियूए गए महान कार्यो के बारे में भी नही मालूम होता है और जैसा कि हमने अभी आपको उपर बताया कि गूगल ने भी डूडल बनाया है उनके 191 बर्थ एनिवर्सरी पर और उन्हें समानित किया है साथ ही हमे याद भी दिलाया है

अगर आप भी गूगल डूडल देखकर ही आये है तो चलिए जानते है कि फातिमा शेख कौन थी

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फातिमा शेख कौमी एकता की प्रतीक और देश की प्रथम मुस्लिम महिला शिक्षिका थी जिनका जन्म 9 जनवरी 1831 को भारत के पुणे महाराष्ट्र में हुआ था । फातिमा एक महिला शिक्षिका के साथ-साथ महान समाज सुधारक ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले की सहयोगी भी रही है

सावित्रीबाई फुले के साथ मिलकर फातिमा शेख ने दलित, मुस्लिम महिलाओं और बच्चों के उन समुदायों को पढ़ाया हैं , जिन्हें वर्ग, धर्म या लिंग के आधार पर शिक्षा से वंचित किया गया था। इसी की वजह से फातिमा शेख को आधुनिक इंडिया की प्रथम महिला मुस्लिम शिक्षिका भी कहा जाता है।

उस वक्त दलित बच्चे शिक्षा से बहुत ज्यादा पिछड़ गए थे जिन्हें ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले अपने ही स्कूल में शिक्षा देकर बहोत ही सराहनीय कार्य कर रही थी जिसके बाद उन दलित समुदाय को शिक्षा देने के लिए फातिमा भी ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले के स्कूल में ही उनके साथ ही उन्हें शिक्षा देने लगी

फातिमा शेख और सावित्रीबाई फुले की मित्रता कैसे हुई यह जानना चाहते है तो आपको बता दे कि अमेरिकी मिसनरी के द्वारा चलाई गई टीचर ट्रैनिंग संस्थान में दोनों को नामांकित किया गया था वही से दोनों करीबी मित्र बन गए थे

फातिमा शेख के सराहनीय कार्य | Fatima Sheikh Social Work in Hindi

भारतीय महिलाओं की आइकॉन फातिमा शेख को सिर्फ भारत की पहली शिक्षिका माना जाता है बल्कि उन्हें समाज सुधारक कार्यों के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। 1848 में फातिमा शेख ने स्वदेशी पुस्तकालय की स्थापना की, जो की लड़कियों के लिए भारत में प्रथम स्कूलों में से एक था।

फातिमा शेख ने ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले को उस वक्त में साथ दिया था, जब कुछ कट्टरपंथियों को महिलाओं को शिक्षित करने की इनकी मुहिम पसंद नहीं आ रही थी जिसके बाद इन दोनों को घर से निकाल दिया गया था। उस वक्त फातिमा ने न सिर्फ इन दोनों को अपने घर में रहने के लिए जगह दी, बल्कि उन्होंने लड़कियों की शिक्षा के लिए पुणे में स्कूल खोलने के लिए जगह भी दी थी।

फातिमा शेख ने सावित्रीबाई फुले के साथ में मिलकर उस वक्त लड़कियों को पढ़ाने का काम चालू किया था जब शूद्रों पर घृणा अपने चरम सीमा पर थी। उस वक्त शूद्रों को शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार प्राप्त नहीं था। ऐसी विपरीत परिस्थितियों में फातिमा ने न सिर्फ स्कूल में पढ़ाया करती थी,

बल्कि हर एक घर में जाकर लड़कियों को शिक्षा का महत्व समझाती थी और शिक्षा ग्रहण करने के लिए प्रेरित भी करती थीं। जिसके वजह से उन्हें समाज के कुछ वर्गों का काफी आक्रोश भी झेलना पड़ा था। लेकिन इसके बाद भी फातिमा ने हार नहीं मानी और लगातार अपना काम जारी रखा।

बच्चो को शिक्षा के छेत्र में आगे ले जाने के लिए फातिमा ने दिन रात महेनत कर रही थी इतना ही नही इन्होंने उन पांचों स्कूलों में भी पढ़ाया जिन स्कूलों की स्थापना सावित्रीबाई फुले ने की थी उन्होंने कभी भी धर्म या जाति के अनुसार शिक्षा नही दी बल्कि सभी को एक ही समझकर शिक्षा दी है

यह भी साफ हो गया था कि वह कुछ सीमित बचो को पढ़ा कर रुकने वाली नही थी बल्कि उसके बाद उन्होंने 1851 में मुम्बई में 2 और स्कूलों की स्थापना में भाग लिया है

फातिमा की तरह ही हमारे देश मे और भी बहोत सी ऐसी महिलाएं है जिन्होंने आने जीवन को समाज की बेहतरी के लिए न्योछावर कर दिया लेकिन इसके बाउजूद भी समाज और सरकार ने उन्हें कभी भी सम्मान नही दिया जिसकी वह सब हकदार थी लेकिन दुनिया का सबसे बड़ा सर्च इंजन गूगल किसी के भी साथ भेद भाव नही करता हैं और उनके सराहनीय कार्यो को समानित करने के लिए गूगल डूडल बनाता है

हालांकि 2014 के बाद से भारत सरकार ने भी अन्य भारतीय शिक्षको के साथ साथ उर्दू की किताबो में भी उनकी प्रोफाइल को दरसाकर उनकी उपलब्धियों के ऊपर प्रकाश डाला है और अब इसके बाद उनके सराहनीय कार्यो के लिए गूगल ने भी 9 जनवरी 2022 को उनकी 191 जयंती पर डूडल बनाकर उनको समानित किया हैं

फातिमा शेख के जीवन से हमें यह सीख मिलती हैं

फातिमा शेख का जीवन उन सामाजिक सुधारों के लिए एक वसीयतनामा के रूप में खड़ा है, जिन्हें स्वतंत्रता पूर्व युग में भारतीय महिलाओं द्वारा अत्यधिक सामाजिक प्रतिरोध का सामना करने के बावजूद चैंपियन बनाया गया था।

वह मुस्लिम इतिहास में एक महत्वपूर्ण व्यक्ति हैं और हमें, एक समाज के रूप में, उन्हें उचित श्रेय देना चाहिए। उनके काम का भी एक बड़ा महत्व है क्योंकि उन्होंने शायद दलितों और मुसलमानों के पहले संयुक्त संघर्ष को चिह्नित किया। उत्पीड़ित समूहों की एकता ने हमेशा मुक्ति के संघर्ष को निर्देशित किया है, जैसा कि बाद में बड़े आंदोलनों में देखा गया।

तो दोस्तो इस पोस्ट में हमने आपको फातिमा शेख का जीवन परिचय आपके साथ शेयर किया है जिनके लिए गूगल ने डूडल भी बनाया है

वैसे उनके द्वारा किये गए सराहनीय कार्यो पर आपके क्या विचार है नीचे कमेंट सेक्शन में शेयर जरूर करे साथ ही इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर जरूर करे ताकि सभी भारत वासियों को उनके बारे में जानने को मिले

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2 thoughts on “फातिमा शेख सोशल रिफॉर्मर | फातिमा शेख का जीवन परिचय | fatima sheikh Biography in hindi , fatima sheikh social reformer in hindi

  1. fatima sheikh ke bare me jankar mujhe bohat achha laga…..
    feeling happy ! Thank you so much is information ke liye.

  2. Amazing, in those conservative male dominated society in Indian Continent a Muslim spearing her head against inequality, what Malala Yusufjai is trying to do,now in Pakistan.

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